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UPI New Rule : क्या आपका भी यूपीआई बंद होने वाला है? सरकार ने लागू किया नया नियम, जानिए पूरी डिटेल

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UPI New Rule

UPI New Rule आज के दौर में जब हर छोटी-बड़ी खरीदारी मोबाइल के एक टैप से हो रही है, यूपीआई (Unified Payments Interface) हमारी जिंदगी का ऐसा हिस्सा बन गया है, जिसके बिना दिनभर के लेन-देन की कल्पना भी मुश्किल लगती है। सब्जी खरीदने से लेकर बड़े-बड़े शॉपिंग मॉल में भुगतान करने तक, लोग कैश की जगह यूपीआई का ही इस्तेमाल करते हैं। लेकिन इसी आसान और तेज़ डिजिटल पेमेंट सिस्टम के साथ एक बड़ी चिंता भी जुड़ी है—धोखाधड़ी। बढ़ते फ्रॉड मामलों को देखते हुए सरकार और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने अब एक बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है।

31 अक्टूबर से बंद हो सकता है “फुल ट्रांजैक्शन सिस्टम”

इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एनपीसीआई पर्सन-टू-पर्सन (P2P) डिजिटल पेमेंट सिस्टम यानी “फुल ट्रांजैक्शन” को बंद करने की तैयारी कर रहा है। माना जा रहा है कि यह व्यवस्था 31 अक्टूबर से खत्म हो सकती है। इस फैसले का सबसे बड़ा कारण है—फुल ट्रांजैक्शन सिस्टम का बढ़ता दुरुपयोग। कई धोखेबाज लोग इसका इस्तेमाल करके भोले-भाले ग्राहकों को आसानी से फंसा लेते हैं। सरकार का मानना है कि इस सिस्टम को बंद करना फ्रॉड कम करने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित होगा।

यूपीआई की लोकप्रियता का नया रिकॉर्ड

अगर आंकड़ों पर नज़र डालें तो यूपीआई की लोकप्रियता किसी रॉकेट से कम नहीं है। 2014 में जहां सिर्फ 500 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए थे, वहीं 2023 में यह संख्या बढ़कर 35 अरब तक पहुंच गई। सोचिए, चाय वाले से लेकर बड़े-बड़े ब्रांड तक, आज हर जगह यूपीआई का इस्तेमाल होता है। यही वजह है कि सरकार भी अब इस डिजिटल क्रांति को और सुरक्षित बनाने पर जोर दे रही है।

1 अरब ट्रांजैक्शन का बड़ा लक्ष्य

सरकार ने अब यूपीआई को और ज्यादा ताकत देने के लिए एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। आने वाले साल तक रोजाना 1 अरब यानी 100 करोड़ ट्रांजैक्शन यूपीआई के जरिए होने चाहिए। फिलहाल, हर महीने 19.5 अरब ट्रांजैक्शन हो रहे हैं जिनकी कुल वैल्यू 25 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है। यह आंकड़ा बताता है कि भारत में 85% डिजिटल पेमेंट सिर्फ यूपीआई के जरिए हो रहा है।

रिकॉर्ड तोड़ते हुए नया मुकाम

2 अगस्त 2025 का दिन यूपीआई के इतिहास में दर्ज हो चुका है। पहली बार इसी दिन एक दिन में 70 करोड़ से ज्यादा ट्रांजैक्शन हुए। जुलाई 2025 में जहां रोजाना औसतन 65 करोड़ ट्रांजैक्शन होते थे, वहीं अगस्त की शुरुआत में यह रिकॉर्ड टूट गया। एक्सपर्ट्स का मानना है कि गैस, बिजली, पानी जैसे बिल और सैलरी के पेमेंट्स यूपीआई से होने लगे हैं, जिसकी वजह से यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है।

आखिर क्या है “फुल ट्रांजैक्शन” और क्यों बंद हो रहा है?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर फुल ट्रांजैक्शन क्या है और इसे क्यों बंद किया जा रहा है। दरअसल, इस सिस्टम में पैसे मांगने वाला व्यक्ति पैसे देने वाले को रिक्वेस्ट भेजता है। जब वह रिक्वेस्ट रिसीव होती है तो देने वाले के फोन पर नोटिफिकेशन आता है। बस, एक क्लिक और ओटीपी डालते ही पेमेंट पूरी हो जाती है। यही आसान तरीका अब धोखेबाजों के लिए हथियार बन चुका है। नकली रिक्वेस्ट भेजकर लोग दूसरों से पैसे हड़पने लगे हैं। इसलिए एनपीसीआई ने ठान लिया है कि इस सिस्टम को खत्म करना ही सबसे बेहतर समाधान है।

कुल मिलाकर, सरकार और एनपीसीआई का यह कदम करोड़ों यूज़र्स के लिए सुरक्षा कवच साबित हो सकता है। अगर आप भी यूपीआई इस्तेमाल करते हैं, तो यह नई व्यवस्था आपके लिए जानना बेहद जरूरी है, ताकि समय रहते आप सतर्क रह सकें।

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