GST News Rules : आम जनता के लिए राहत की बड़ी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार के तहत गठित Ministerial Group (GoM) ने हाल ही में ऐसी सिफारिशों को मंजूरी दी है जो सीधे तौर पर रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर असर डालेंगी। लंबे समय से लोग शिकायत कर रहे थे कि ज़रूरी वस्तुओं पर भी GST लागू होने से घरेलू बजट बिगड़ रहा है। अब GoM की इन सिफारिशों से दाल, आटा, चावल, दूध पाउडर और घरेलू गैस जैसी बुनियादी ज़रूरतों पर टैक्स में राहत मिलेगी।
रसोई का खर्च होगा हल्का
GoM की मंजूरी के बाद अब ज़रूरी खाद्य पदार्थों पर या तो GST दर घटाई जाएगी या पूरी तरह खत्म कर दी जाएगी। पहले इन पर 5% से 12% तक टैक्स लगता था, जिससे आम परिवारों की थाली महंगी हो रही थी। प्रस्ताव के अनुसार बिना ब्रांडेड और अनपैक्ड वस्तुओं के साथ-साथ कुछ पैक्ड आइटम्स पर भी टैक्स में छूट मिलेगी। इसका सीधा फायदा करोड़ों परिवारों को होगा और महंगाई का बोझ कुछ कम महसूस होगा।
बच्चों के सामान पर भी राहत
इस बदलाव का असर बच्चों से जुड़े सामानों पर भी दिखेगा। स्टेशनरी, स्कूल बैग्स, पेंसिल, रबर और ड्राइंग किट जैसी वस्तुओं पर पहले 12% तक टैक्स लगता था। अब इन पर GST दर घटाकर 5% या उससे भी कम करने की सिफारिश की गई है। इससे शिक्षा पर होने वाला अतिरिक्त खर्च कम होगा और मध्यमवर्गीय परिवारों को राहत मिलेगी। सरकार का मानना है कि यह कदम शिक्षा को सस्ता और सुलभ बनाने की दिशा में एक अहम पहल है।
घरेलू क्लीनिंग उत्पाद होंगे सस्ते
सिर्फ खाने-पीने की चीजें ही नहीं, बल्कि टॉयलेट क्लीनर, वॉशिंग पाउडर, बर्तन धोने का साबुन और घर की सफाई से जुड़ी वस्तुओं पर भी टैक्स घटाने का प्रस्ताव है। अभी तक इन पर 18% तक GST लगाया जा रहा था, जिससे परिवारों का मासिक खर्च बढ़ रहा था। अब इन पर टैक्स दरें 12% या उससे कम हो सकती हैं। यह बदलाव आम उपभोक्ता की जेब को सीधी राहत देगा।
MSME सेक्टर को बड़ी मदद
छोटे और मझोले उद्योगों (MSME) को भी इस बदलाव से राहत मिलने वाली है। कई ऐसे उत्पाद जो छोटे उद्योग बनाते हैं, उन पर भी टैक्स दरें घटाई जा सकती हैं। इससे उत्पादन लागत कम होगी और इनकी मांग बाज़ार में और बढ़ेगी। साथ ही, MSME क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। यह कदम आत्मनिर्भर भारत मिशन को मजबूत करने वाला साबित हो सकता है।
डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा
GoM ने यह भी सुझाव दिया है कि डिजिटल भुगतान करने वाले व्यापारियों और ग्राहकों को टैक्स में विशेष रियायत दी जाए। इसका उद्देश्य UPI, कार्ड और QR कोड जैसे कैशलेस ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देना है। इससे टैक्स चोरी पर लगाम लगेगी और अर्थव्यवस्था और भी संगठित होगी।
GST स्लैब होंगे आसान
वर्तमान में GST के 5 अलग-अलग स्लैब – 0%, 5%, 12%, 18% और 28% हैं। GoM ने सुझाव दिया है कि इन्हें घटाकर केवल 3 या 4 स्लैब कर दिया जाए। जैसे 12% और 18% स्लैब को मिलाकर एक किया जा सकता है। इससे टैक्स कैलकुलेशन आसान होगा और उपभोक्ताओं को कीमतों का बेहतर अंदाजा लगेगा।
अब आगे क्या?
इन सिफारिशों को अब GST परिषद (GST Council) के सामने रखा जाएगा, जहां केंद्र और राज्य मिलकर अंतिम फैसला लेंगे। अगर मंजूरी मिल जाती है, तो ये बदलाव तुरंत लागू हो सकते हैं या फिर अगली वित्तीय तिमाही से लागू होंगे।
निष्कर्ष
GoM की ये सिफारिशें आम जनता के लिए किसी राहत पैकेज से कम नहीं हैं। अगर इन्हें मंजूरी मिलती है तो खाने-पीने से लेकर शिक्षा और घरेलू उपयोग की वस्तुओं तक सबकुछ सस्ता हो जाएगा। इससे न सिर्फ महंगाई पर लगाम लगेगी बल्कि बाज़ार में मांग भी बढ़ेगी, जो अर्थव्यवस्था को गति देने वाला साबित होगा।