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Supreme Court Dog News : सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: अब आवारा कुत्तों के लिए बने 5 बड़े नियम, हर नागरिक को जानना ज़रूरी!

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Supreme Court Dog News

Supreme Court Dog News : सुप्रीम कोर्ट से आया हालिया फैसला पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। यह फैसला न सिर्फ डॉग लवर्स के लिए बड़ी जीत है, बल्कि उन लोगों के लिए भी बेहद अहम है जो स्ट्रीट डॉग्स से परेशान रहते हैं। अदालत ने साफ किया है कि अब आवारा कुत्तों के भी अधिकार हैं और उन्हें सम्मान और सुरक्षा मिलनी चाहिए। इस आदेश के बाद देशभर में आवारा कुत्तों को लेकर व्यवस्था पूरी तरह बदलने जा रही है।

आवारा कुत्तों की हत्या पूरी तरह बैन

पहली और सबसे बड़ी बात यह है कि अब किसी भी आवारा कुत्ते को मारना या नुकसान पहुंचाना पूरी तरह गैरकानूनी घोषित कर दिया गया है। इससे पहले कई बार खबरें आई थीं कि अलग-अलग जगहों पर कुत्तों को ज़हर देकर या मारपीट करके खत्म कर दिया जाता था। सुप्रीम कोर्ट ने इसे पशु क्रूरता कानून के तहत गंभीर अपराध माना है। यानी अब अगर कोई भी व्यक्ति ऐसा करता है, तो उस पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।

फीडिंग ज़ोन होंगे तय

दूसरा बड़ा बदलाव यह है कि अब डॉग लवर्स कहीं भी जाकर कुत्तों को खाना नहीं खिला सकेंगे। इसके लिए नगर निकाय और RWA मिलकर फीडिंग ज़ोन तय करेंगे। इन जगहों पर कुत्तों को सुरक्षित तरीके से भोजन दिया जाएगा, ताकि डॉग लवर्स अपने दायित्व निभा सकें और स्थानीय निवासियों को भी असुविधा न हो। इससे सोसाइटी और मोहल्लों में होने वाले विवाद काफी हद तक खत्म हो सकते हैं।

डॉग लवर्स पर रोक नहीं, लेकिन नियमों के तहत

अक्सर सोसाइटी में देखा गया है कि कुत्तों को खिलाने वालों और बाकी निवासियों के बीच विवाद हो जाते हैं। अब सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि डॉग लवर्स को कुत्तों की देखभाल करने से रोका नहीं जा सकता, लेकिन यह काम तय नियमों और फीडिंग ज़ोन के अनुसार ही होना चाहिए। यानी न तो डॉग लवर्स को ताने दिए जाएंगे और न ही वे मनमानी करेंगे।

स्टरलाइजेशन और वैक्सीनेशन अनिवार्य

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि अब सभी आवारा कुत्तों का स्टरलाइजेशन और वैक्सीनेशन नगर निगम और पशु कल्याण संस्थाओं की जिम्मेदारी होगी। ऐसा करने से कुत्तों की आबादी पर नियंत्रण होगा और बीमारियों से भी बचाव मिलेगा। इसके साथ ही लोगों की सुरक्षा चिंताएं भी कम होंगी क्योंकि वैक्सीनेटेड और नियंत्रित कुत्ते अधिक सुरक्षित रहते हैं।

हमले की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी होगी?

यह सवाल हमेशा से लोगों के मन में रहा है कि अगर स्ट्रीट डॉग किसी पर हमला करे तो जिम्मेदारी किसकी होगी। कोर्ट ने इस पर भी स्पष्टता दी है। यदि घटना किसी पंजीकृत फीडिंग ज़ोन में होती है और सभी नियमों का पालन किया गया है, तो जिम्मेदारी स्थानीय निकाय की होगी। लेकिन अगर कोई व्यक्ति तय नियमों का उल्लंघन करके कहीं भी कुत्तों को खिला रहा है और वहां कोई घटना घटती है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

आम आदमी के लिए सीख

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला संतुलन बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। आम लोगों को यह समझना होगा कि स्ट्रीट डॉग्स भी इस समाज का हिस्सा हैं और उनके साथ हिंसा अब कानूनी अपराध है। वहीं, डॉग लवर्स को भी ध्यान रखना होगा कि उनका हक दूसरों की सुरक्षा से बड़ा नहीं है। अगर हर कोई नियमों का पालन करे, तो समाज में शांति और इंसानियत दोनों कायम रह सकती हैं।

निष्कर्ष

यह फैसला न सिर्फ डॉग लवर्स को राहत देने वाला है, बल्कि पूरे समाज में सामंजस्य बनाने वाला कदम है। अब न तो कुत्तों को नुकसान पहुंचाया जा सकेगा और न ही लोगों की सुरक्षा से समझौता होगा। सब कुछ एक तय सिस्टम के तहत चलेगा, जो इंसान और जानवर दोनों के लिए फायदे का सौदा साबित होगा।

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